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चित्रकोट की कुडूक मछुआ समिति को मिला राज्य अलंकरण, सहकारिता के दम पर बस्तर ने रचा इतिहास, ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार 2026 से सम्मानित….

रायपुर: छत्तीसगढ़ के 26 वें राज्य स्थापना दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर बस्तर जिले ने सहकारिता के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। सहकारिता के मूल सिद्धांतों को निष्ठापूर्वक अपनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यटन को नई दिशा देने वाली लोहण्डीगुड़ा विकासखंड की प्राथमिक कुडूक मछुआ सहकारी समिति मर्यादित चित्रकोट को राज्य शासन द्वारा प्रतिष्ठित ठाकुर प्यारेलाल सिंह राज्य अलंकरण 2026 से विभूषित किया गया। राज्योत्सव के अवसर पर मुख्य अतिथि देश के गृह मंत्री श्री अमित शाह के करकमलों से यह गरिमामय सम्मान श्री धनसिंह बघेल ने ग्रहण किया।

विगत करीब 17 वर्ष पहले 23 मार्च 2009 को पंजीकृत यह समिति आज बस्तर के 62 मछुआ परिवारों के लिए एक मजबूत जीवनरेखा बन चुकी है। विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात पर पर्यटन और मत्स्याखेट को अपनी मुख्य गतिविधि बनाते हुए समिति ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। शासन या बाहरी वित्तीय सहायता पर निर्भर रहने के बजाय समिति ने अपनी स्वयं की अर्जित आय से न केवल 7 कार्यशील नौकाओं की खरीद की, बल्कि अपने कार्यालय भवन का निर्माण भी सफलतापूर्वक पूरा कराया।

चित्रकोट की कुडूक मछुआ समिति को मिला राज्य अलंकरण

पर्यटन सेवा के क्षेत्र में समिति ने सुरक्षा और किफायती दर का एक बेहतरीन मॉडल प्रस्तुत किया है। चित्रकोट जलप्रपात में पर्यटकों को मात्र 50 रुपए प्रति व्यक्ति की दर से सुरक्षित नौका विहार कराया जा रहा है, जिसकी बदौलत पर्यटकों का विश्वास तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2023-24 में जहां 30,775 सैलानियों ने नौका विहार का आनंद लिया था, वहीं पिछले दो वर्षों में यह आंकड़ा दोगुने से अधिक बढ़कर वर्ष 2025-26 में 70 हजार से ज्यादा तक पहुंच गया, जिससे समिति को 35 लाख रुपए से अधिक का उल्लेखनीय राजस्व प्राप्त हुआ।

पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन और सदस्यों की कड़ी मेहनत के दम पर समिति ने वर्ष 2025-26 के दौरान साढ़े पांच लाख रुपए का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जिसमें से सदस्यों को ढाई प्रतिशत की दर से लाभांश भी वितरित किया गया। बीते 31 मार्च 2026 की वित्तीय स्थिति के अनुसार समिति का संचित लाभ 37 लाख रुपए तक पहुंच चुका है। ग्रामीण सहकारिता, आजीविका संवर्धन और पर्यटन प्रबंधन का यह बेजोड़ संगम आज पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है।