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‘सेवा संकल्प अभियान’ : ​बदलाव की बयार: ‘सेवा के संकल्प’ से संवरता बस्तर…..

रायपुर: ​कभी अपनी भौगोलिक विषमताओं, सुदूर वनांचलों और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक संघर्षों के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर संभाग में आज बदलाव की एक नई इबारत लिखी जा रही है। यह बदलाव सिर्फ कागजी आंकड़ों, घोषणाओं या विकास के औपचारिक दावों तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘सरकार आपके द्वार’ के ध्येय वाक्य को जमीनी धरातल पर चरितार्थ करते हुए बस्तर के अंतिम छोर तक शिक्षा, अवसर, और उम्मीद पहुंचाने की एक अत्यंत जीवंत गाथा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार के समर्पित प्रयासों और केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से बस्तर का युवा अब उपेक्षा, अशिक्षा और अभावों के अंधेरे से बाहर निकलकर अपनी एक नई और सशक्त पहचान गढ़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के बजट में की गई 50 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि ने अंचल की प्रतिभाओं के सपनों को नई उड़ान दी है, जिससे कभी संसाधनों के लिए जूझने वाले इस क्षेत्र में अब संभावनाओं के नए द्वार खुल रहे हैं।

​’मेरु’ अनुदान से विश्वस्तरीय शिक्षा का सपना साकार

बस्तर के दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं रही है; कमी थी तो बस उन्हें सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर प्रदान करने वाले एक सुदृढ़ तंत्र की। ‘छू लो आसमान’, ‘ज्ञानगुड़ी’ और ‘हमर लक्ष्य’ जैसी संवेदनशील और दूरदर्शी पहलों के जरिए बस्तर के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग और आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, बल्कि एक ऐसा समग्र शैक्षणिक माहौल तैयार किया गया है जिसने युवाओं में राष्ट्रीय मुख्यधारा से जुड़ने का नया आत्मविश्वास जगाया है।

​इस शैक्षणिक क्रांति का सबसे मजबूत और प्रभावकारी स्तंभ बनकर उभरा है जगदलपुर का शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय। इसे ‘प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान’ (PM-USHA) के तहत ‘मेरु’ (Multi-disciplinary Education and Research University – MERU) योजना से 100 करोड़ रुपये का विशाल अनुदान प्राप्त हुआ है। इस ऐतिहासिक वित्तीय मदद से विश्वविद्यालय परिसर में विश्वस्तरीय शोध एवं अनुसंधान केंद्रों, आधुनिक प्रयोगशालाओं, डिजिटल लाइब्रेरी, कौशल विकास केंद्रों और उन्नत इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण अभूतपूर्व गति से हो रहा है। इसके माध्यम से बस्तर के विद्यार्थियों को अब उच्च शिक्षा और अत्याधुनिक अनुसंधानों के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

​रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों और नवाचार से सशक्त होती युवा पीढ़ी

​शैक्षणिक परिदृश्य को धरातल पर सुदृढ़ और व्यापक बनाने के लिए शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में 20 नए अध्ययन विभागों की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए  नए पदों की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस पहल से बस्तर के मेधावी युवाओं को अपने ही क्षेत्र में योग्य अध्यापकों और विशेषज्ञों से गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है।
युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देने और उन्हें सीधे रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से कई आधुनिक और मांग- आधारित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का खाका तैयार किया गया है।

व्यावसायिक एवं तकनीकी पाठ्यक्रम के अंतर्गत फार्मेसी, विधि (Law), और शारीरिक शिक्षा जैसे रोजगारपरक अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराया जा रहा है। ​शिक्षक प्रशिक्षण में नवाचार के तहत राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप 4-वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (ITEP) की शुरुआत की जा रही है। इसी तरह ‘इनोवेशन महाकुंभ’ जैसे वृहद आयोजनों के माध्यम से छात्र-छात्राओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी सोच और स्टार्टअप/नवाचार का बीजारोपण किया जा रहा है। ​इन प्रयासों से बस्तर की नई पीढ़ी न केवल पारंपरिक डिग्रियां हासिल कर रही है, बल्कि आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रासंगिक कौशल भी अर्जित कर रही है।

​सुदूर अंचलों तक शिक्षा की सीधी पहुंच और बुनियादी ढांचा

राज्य सरकार का ‘सेवा संकल्प’ केवल संभागीय मुख्यालय जगदलपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार बस्तर के सबसे दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों तक किया गया है। अंचल के शासकीय महाविद्यालयों का कायाकल्प करने के लिए 65 करोड़ रुपये की विशेष प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। इसके अंतर्गत अत्याधुनिक अध्ययन भवनों, सुरक्षित छात्र-छात्राओं के छात्रावासों, खेल मैदानों और बाउंड्रीवाल का निर्माण कार्य तेजी से पूर्ण किया जा रहा है।

क्षेत्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों को मॉडल सेंटर के रूप में विकसित करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए गए हैं।​काकतीय पीजी कॉलेज, जगदलपुर में 5 करोड़ रुपये के विशेष फंड से परिसर में नई प्रयोगशालाओं, ऑडिटोरियम और स्मार्ट क्लासरूम का निर्माण किया जाएगा। ​इंदरु केंवट कन्या महाविद्यालय, कांकेर में 5 करोड़ रुपये की अनुदान राशि से छात्राओं के लिए आधुनिक सुविधाएं और विशेष अध्ययन केंद्र स्थापित किए जा रहे है। ​दूरस्थ अंचलों  नगरनार और किलेपाल जैसे सुदूरवर्ती एवं संवेदनशील क्षेत्रों में नए शासकीय महाविद्यालयों की स्थापना की गई है, जिससे ग्रामीण व जनजातीय छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े।

​मुख्यधारा में कदमताल करता बस्तर का युवा

आज बस्तर में बदलाव की जो बयार बह रही है, वह केवल भौतिक बुनियादी ढांचे के निर्माण तक सीमित नहीं है; यह बस्तर के जन-मन के सोच में आए सकारात्मक परिवर्तन की परिचायक है। जिस अंचल में कभी बंदूक और हिंसा की गूंज हुआ करती थी, आज वहां की वादियों में किताबों के पन्ने पलटने की सरसराहट और नवाचार की चर्चाएं सुनाई देती हैं।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के जरिए सरकार ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि नीतियां संवेदनशील हों और क्रियान्वयन में प्रतिबद्धता हो, तो सबसे जटिल चुनौतियों को भी अवसरों में बदला जा सकता है। आज बस्तर का युवा न केवल गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा से सशक्त हो रहा है, बल्कि विविध रोजगार, स्वरोजगार और नवाचारों के अवसरों से जुड़कर छत्तीसगढ़ राज्य और संपूर्ण देश की प्रगति में कंधे से कंधा मिलाकर अपनी सशक्त भागीदारी सुनिश्चित कर रहा है। अभावों से उम्मीद और संघर्ष से सफलता की ओर बढ़ता यह बस्तर, नए भारत के निर्माण की एक अनुकरणीय और प्रेरणादायी मिसाल बन चुका है।