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​सुशासन की नई बयार: सारंगढ़-बिलाईगढ़ के 859 परिवारों को मिला राशनकार्ड का ‘त्वरित’ उपहार…..

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की सुशासन नीति जमीनी स्तर पर रंग ला रही है। इसका सबसे ताजा और बेहतरीन उदाहरण ‘सुशासन तिहार 2026’ में देखने को मिला, जहां जिला सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिले के 859 हितग्राहियों की राशनकार्ड से जुड़ी समस्याओं का महकमे ने तत्काल निराकरण कर दिया। सालों-महीनों का काम दिनों में होने से अब इन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के घरों में न केवल समय पर राशन पहुंच रहा है, बल्कि उनके चेहरों पर संबल और मुस्कान भी लौट आई है।

खाद्य विभाग द्वारा संवेदनशीलता दिखाते हुए जिले के तीनों विकासखंडों सारंगढ़, बरमकेला और बिलाईगढ़ में शिविर लगाकर और आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए नए राशनकार्ड बनाने, नाम जोड़ने और नाम हटाने (विलोपित करने) के काम को युद्धस्तर पर पूरा किया गयासुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में खाद्य विभाग द्वारा किए गए कार्यों के आंकड़े इसकी जमीनी सफलता को साफ बयां करते हैं।

जिले के तीनों विकासखंडों में राशनकार्ड से जुड़े कार्यों को पूरी तत्परता से निपटाया गया।बिलाईगढ़ विकासखंड इस मुहिम में सबसे आगे रहा, जहां रिकॉर्ड 200 नए राशनकार्ड बनाए गए, 105 लोगों के नाम मौजूदा कार्डों में जोड़े गए और 123 सदस्यों के नाम विलोपित (हटाए) किए गए। इसी तरह बरमकेला विकासखंड में भी प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए 88 नए राशनकार्ड जारी किए, 39 नाम जोड़े और 71 नामों को विलोपित किया। वहीं सारंगढ़ विकासखंड की बात करें, तो यहाँ 55 नए परिवारों को राशनकार्ड का लाभ मिला, जबकि 86 नए नाम जोड़ने और 92 नाम हटाने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। ​इस तरह पूरे जिले में सामूहिक रूप से 343 नए राशनकार्डों का निर्माण हुआ, 230 हितग्राहियों के नाम जोड़े गए और 286 सदस्यों के नाम विलोपित किए गए, जिससे कुल 859 नागरिकों की समस्याओं का सीधा समाधान हुआ।​

घर-घर पहुंचा कुशल भरण-पोषण का आधार

​राशनकार्ड सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के कुशल भरण-पोषण का सबसे मजबूत आधार है। सुशासन तिहार के माध्यम से प्रशासन ने फाइलों के चक्कर काटने की मजबूरी को खत्म कर ‘त्वरित न्याय’ की अवधारणा को सच कर दिखाया है। ​बिलाईगढ़ विकासखंड में जहां सबसे ज्यादा 200 नए राशनकार्ड जारी किए गए, वहीं सारंगढ़ और बरमकेला में भी त्रुटि सुधार और नाम जोड़ने की प्रक्रियाओं को बेहद आसान बनाकर लोगों को राहत दी गई। साय सरकार का यह ‘सुशासन तिहार’ वास्तव में प्रदेश के गरीब परिवारों के लिए खुशियों का त्योहार साबित हो रहा है।